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अहिंसा परमो धर्म:

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That with the help of which we can know the truth, control the restless mind, and purify the soul is called knowledge.

Mahavira (Mulachara, 5/70)

न कोई मेरा शत्रु है न मित्र, मैं स्वयं वीतरागी ज्ञानी, ज्ञाता-दृष्टा हूँ। मेरे में उत्तम क्षमा सदा ही निवास करती है।...

सदा से ही मानव मन अति जिज्ञासु है। प्रकृति के रहस्यों के प्रति उसकी जिज्ञासा तो कमाल की ही है...

आध्यात्मिकता क्या है? आज के चरम भौतिकवादी युग में जहां व्यक्ति भौतिक इन्द्रिय सुखों की सामग्री के संकलन हेतु ...

तनाव (Tension) – भय, चिन्ता, दबाव अथवा कार्य को शीघ्रता से पूर्ण करने की बाध्यता/इच्छाजनित एक विशिष्ट शारीरिक मानसिक स्थिति ...

पंजाब-हरियाणा एवं हिमाचल

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भगवान महावीर के सिद्धांत

  • अहिंसा

    प्राणियों को नहीं मारना, उन्हे नहीं सताना। जैसे हम सुख चाहते हैं, कष्ट हमें प्रीतिकर नहीं लगता, हम मरना नहीं चाहते, वैसे ही सभी प्राणी सुख चाहते हैं कष्ट से बचते हैं, और जीना चाहते हैं। हम उन्हें मारने/सताने का भाव मन में न लायें, वैसे वचन न कहें और वैसा व्यवहार/कार्य भी ना करें। मनसा, वाचा, कर्मणा प्रतिपालन करने का महावीर का यही अहिंसा का सिद्धांत है। अहिंसा, अभय और अमन चैन का वातावरण बनाती है।इस सिद्धांत का सार-सन्देश यही है कि प्राणी-प्राणी के प्राणों से हमारी संवेदना जुडे और जीवन उन सबके प्रति सहायी/सहयोगी बनें।
  • अनेकांत

    भगवान महावीर का दूसरा सिद्धांत अनेकांत का है। अनेकांत का अर्थ है- सह-अस्तित्व, सहिष्णुता, अनुग्रह की स्थिति। इसे ऐसा समझ सकते हैं कि वस्तु और व्यक्ति विविध धर्मी हैं।
  • अपरिग्रह

    भगवान महावीर का तीसरा सिद्धांत अपरिग्रह का है। अर्थात संग्रह- यह संग्रह मोह का परिणाम है। जो हमारे जीवन को सब तरफ से घेर लेता है, जकड लेता है, परवश/पराधीन बना देता है वह है परिग्रह। धन पैसा आदि लेकर प्राणी के काम में आने वाली तमाम वस्तु/सामग्री परिग्रह की कोटि में आती है।

जैन धर्म के पाँच मूलभूत सिद्धांत :

इस जगत का प्रत्येक जीव अपने मूल स्रोत — अपने शाश्वत चैतन्य स्वरुप से अलग वियोजित हो गया है परन्तु केवल मानव जीवन में यह संभावना है कि इस स्रोत को पहचान कर हम अपने चैतन्य स्वरुप कीओर लौटकर उससे एकीकार हो सकें। अतः धर्म का अर्थ है अपने पृथक हो गए शाश्वत स्वरुप से पुनः संबंध स्थापित करना। और इसी पुनर्स्थापना में धार्मिक संप्रदाय इस नश्वर जगत के मोह से छूटकर अनंत आनन्दमय शाश्वत जगत के साथ संबंध जोड़ने की कला हमें सिखाते हैं।

  • अहिंसा

  • सत्य

  • अचौर्य

  • ब्रह्मचर्य

  • अपरिग्रह

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